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क्‍या नीतीश ने दूर की गोटी खेली है?

पटना: तो आखिरकर बिहार में खेला हो गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बीच गठबंधन टूट चुका है। सीएम नीतीश कुमार को फिर से उनकी पार्टी पीएम मैटेरियल बताने लगी है। यानी सीएम नीतीश की वो पुरानी कसक जिसकी उन्होंने खुद तो कभी चर्चा नहीं की लेकिन उनके दल के नेता गाहे-बगाहे लगातार कहते रहे हैं। आरजेडी भी उन्हें पीएम पद का दावेदार बताती रही है। 2013 में भी जब बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बताया था तो नीतीश ने इसका विरोध करते हुए बीजेपी से गठबंधन तोड़ लिया था। तब भी कहा गया था कि नीतीश भी पीएम मैटेरियल हैं। 2015 में बिहार में महागठबंधन की जीत के बाद भी उन्

मंजु उरांव के खिलाफ समाज का तुगलकी फरमान स्‍वीकार्य नहीं, विरोध होगा : सेंगेल

by admin on Thu, 08/04/2022 - 21:18

आदिवासी महिला मंजू उरांव (गुमला जिला) को  ट्रैक्टर से खेती करने के एवज में गांव वालों ने अंधविश्वास के आधार पर उनको ट्रैक्टर चलाने से मना किया, जुर्माना लगाया और बात नहीं मानने पर सामाजिक बहिष्कार करने का एकतरफा तुगलकी फरमान जारी किया है। जो संविधान कानून के खिलाफ है। स्त्री पुरुष की बराबरी के दर्जे के खिलाफ है और बिल्कुल एक अंधविश्वास वाला फरमान है। गलत है। आदिवासी सेंगेल अभियान, जिला पुलिस- प्रशासन और प्रदेश की सरकार से अविलंब मंजू उरांव को सुरक्षा और न्याय प्रदान करने की मांग करता है। बल्कि  उनको उनकी खेती और कृषि के विकास के लिए प्रोत्साहन और पूर्ण सहयोग भी सरकार को प्रदान करना चाहिए और

सरना धर्म कोड और द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में सेंगेल का दिल्‍ली में प्रदर्शन

रांची/दिल्‍ली: दिल्ली के जंतर मंतर में 30 जून 2022 को आदिवासी सेंगेल (सशक्तिकरण) अभियान द्वारा आदिवासियों के प्रकृति पूजा धर्म - "सरना धर्म" की मान्यता हेतु धरनाप्रदर्शन किया गया। भारी बारिश के बावजूद प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक झारखंड ,बंगाल, उड़ीसा, असम, बिहार आदि से सेंगेल के नेता/ कार्यकर्ता लगभग एक हजार की संख्या में "सरना धर्म कोड देना होगा" की नारेबाजी करते हुए डटे रहे। धरना- प्रदर्शन में भीगते हुए सेंगेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद    सालखन मुर्मू ने सब को संबोधित किया।

सालखन ने रांची प्रशासन के खिलाफ राज्‍यपाल से शिकायत की

सेंगेल अभियान के अध्‍यक्ष व पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने रांची प्रशासन पर पक्षपात पूर्ण रवैया का आरोप लगाते हुए रांची के एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश के राज्‍यपाल को पत्र लिखकर शिकायत की है और गंभीर कार्रवाई की मांग की है। पत्र में मांग की गई है: 

1)         कृपया आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा आपको प्रेषित 5 मई 2022 के पत्र का अवलोकन करें। जो संलग्न है। हमलोग 02.05.2022 को आपसे भेंट कर इस मामले पर आपको ज्ञापन पत्र प्रदान करना चाहते थे मगर आप आउट ऑफ स्टेशन थे।

स्कूली मध्याह्न भोजन में रोजाना एक अंडा शामिल हो : अर्थशास्त्री  डॉ ज्यां  द्रेज

by admin on Fri, 06/10/2022 - 12:11

रांची: झारखंड के स्कू‍ली बच्चों के स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा को लेकर जानेमाने अ‍र्थशास्त्री  डॉ ज्यां द्रेज ने चिंता जाहिर की है। डॉ द्रेज ने झारखंड के वित्त् मंत्री को ए‍क पत्र लिखकर इस ओर ध्यान दिलाया है। पत्र में उन्हों ने बताया है कि झारखंड के बच्चे दुनिया भर में सबसे अधिक कुपोषित हैं। इनकी शिक्षा भी पर्याप्त नहीं हो पा रही है। डॉ द्रेज ने सुझाव दिया है कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन को और अधिक पौष्टिक बनाने के लिये थाली में रोजाना एक अंडा शामिल किया जाये। अभी हफ्ते में मात्र दो दिन अंडा दिया जाता है। अर्थशात्री का मानना है कि इन दिनों स्कूलों में बच्चों  की उपस्थिति भी घटती जा रही है। मध्या

आदिवासी सेंगेल अभियान आदिवासी स्‍वशासन व्‍यवस्‍था में सुधार अनिवार्य है

आदिवासी स्वशासन (माझी परगाना) व्यवस्था में सुधार अविलंब अनिवार्य है। अन्यथा आदिवासी समाज में संविधान- कानून और जनतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन जारी रहेगा। कुछ नासमझ व्यक्ति और संगठन प्रथा- परंपरा आदि के नाम पर आदिवासी समाज में नशापान, अंधविश्वास, डायन प्रथा, ईर्ष्या द्वेष, वोट की खरीद- बिक्री, आदिवासी महिला विरोधी मानसिकता, डंडोम  (जुर्माना), बारोन (सामाजिक बहिष्कार), डॉन पनते ( डायन खोज ), वंशानुगत माझी- परगाना व्यवस्था आदि को जोर जबरदस्ती चालू रखते हैं। जो संविधान कानून और मानव अधिकारों के खिलाफ है। अभियान के अध्‍यक्ष सालखन मुर्मू ने एक विज्ञप्ति जारी करके यह बयान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना वेश्‍यावृत्ति पेशा है, पुलिस परेशान न करे

by admin on Fri, 05/27/2022 - 12:07

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति को पेशा माना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस इसमें दखलंदाजी नहीं कर सकती और न ही सहमति से यह काम करने वाले सेक्स वर्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट ने सभी राज्यों की पुलिस को सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करने का निर्देश दिया है। बेंच ने सेक्स वर्करों के अधिकारों की रक्षा के लिए दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। कोर्ट ने इन सिफारिशों पर सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई तय की है। केंद्र को इन पर जवाब देने को कहा है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से क्या कुछ कहा गया है-

संताली राजभाषा रैली - 30 अप्रैल को रांची में और सरना धर्म कोड रैली - 30 जून को दिल्‍ली 

by admin on Sat, 04/09/2022 - 09:47

आदिवासी सेंगेल अभियान के मंच से झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम राज्यों में 2 मार्च से 3 अप्रैल 2022 तक 5 प्रदेशों में 25 सेंगेल जनसभाओं द्वारा उपरोक्त कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार किया गया है। सेंगेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू और केंद्रीय संयोजक सुमित्रा मुर्मू ने सभी सेंगेल जनसभाओं को 5 प्रदेशों में संबोधित किया है। अभी 5 अप्रैल को असम से दौरे के बाद जमशेदपुर वापस लौटे हैं। फिर 10 अप्रैल को भुवनेश्वर, 12 अप्रैल को गोड्डा जिला (महागामा- महादेवबथन ), 13 अप्रैल दुमका जिला ( रामगढ़ ), 14 अप्रैल गिरिडीह जिला (पीरटांड़- मोनाटंड), 15 अप्रैल पुरुलिया जिला (बलरामपुर), 16 अप्रैल मयूरभंज जि

एचईसी को बहुत याद आयेंगे पिल्लई साब..!

by admin on Thu, 03/31/2022 - 20:29

एचईसी यानी हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सपनों का मंदिर। इस भीमकाय कारखाने ने अपनी स्थापना के बाद से ही भारत ही नहीं दुनिया के स्टील उत्पाद जगत में धूम मचायी थी। लेकिन तीन दशक पहले इसके दिन बिगड़ने लगे थे। एक के बाद एक कई दिग्गज प्रशासकों को इसे संभालने के लिए लाया गया। इन्हीं में से एक थे जी के पिल्लई। पूरा नाम था। गोपी कुमार पिल्लई। पिल्लई जी ने जब एचईसी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक यानी सीएमडी का पद संभाला तो लोगों में जबरदस्त आशा का संचार हुआ। पिल्लई के काम काज से एचईसी के सुधार को लेकर खूब चर्चा हुई। काफी कुछ बदला भी। एचईसी परिसर के लोग और कर्म

देश में वंशानुगत जंजीरों में जकड़े संताली समाज को मुक्‍त कराइये राष्‍ट्रपति महोदय : सेंगेल अभियान

by admin on Wed, 03/16/2022 - 10:29

आदिवासी सेंगेल अभियान का मानना है कि भारत के आदिवासी संताल समाज में व्याप्त वंशानुगत माझी-परगाना स्वशासन व्यवस्था जाने- अनजाने झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम आदि प्रदेशों में संताल समाज को गुलामी की जंजीरों में कैद कर रखा है। यह रूढ़िवादी राजतांत्रिक व्यवस्था भारतीय संविधान, कानून, मानवाधिकारों और जनतांत्रिक प्रक्रियाओं और मूल्यों के खिलाफ खड़ा है। यह व्यवस्था अधिकांश संताल गांव- समाज को पंगु और गुलाम बनाकर रखा है। जिसे निरंकुश और तुगलकी राजा की तरह माझी- परगाना चला रहे हैं। आदिवासी संताल समाज में विद्यमान इस आत्मघाती व्यवस्था की तुलना सती प्रथा के साथ की जा सकती है। अतएव भारत सरकार, संबंध