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नोटबंदी दानवी कृत्य : ममता

by admin on Tue, 11/07/2017 - 19:27

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को नोटबंदी को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी निंदा की। ममता ने नोटबंदी को दानवी कार्य बताया और सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा निहित स्वार्थो के लिए काले धन को बदलकर सफेद करने के लिए नोटबंदी लागू करने का आरोप लगाया।

ममता बनर्जी ने सोमवार को नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन में अपने ट्विटर अकाउंट पर तस्वीर को बदलकर काला कर दिया।

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने अपने पार्टी नेताओं को नोटबंदी के खिलाफ इसकी पहली वर्षगांठ पर मंगलवार को 'ब्लैक डे' मनाने का निर्देश दिया।

''मैंने विवादित ढांचा तुड़वाया था, इसकी जिम्मेदारी लेता हूं, चाहे तो फांसी दे दो''

by admin on Mon, 11/06/2017 - 15:09

कानपुरः श्रीराम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष रामविलास वेदांती ने अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि मैंने ही ये ढांचा गिरवाया था, ये बात मैंने कोर्ट में भी कही थी। अब फिर से कह रहा हूं, चाहे तो मुझे फांसी दे दो। वे कानपुर के किदवई नगर स्थित संत सम्मेलन में पहुंचे थे। इस सम्मेलन में जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेव सरस्वती महाराज, स्वामी चिन्मयानंद, साध्वी प्राची समेत कई महामंडलेश्वर मौजूद थे। इस दौरान राम मंदिर के मुद्दे पर संतो ने विस्तर से चर्चा हुई।

सालखन ने रांची प्रशासन के खिलाफ राज्‍यपाल से शिकायत की

सेंगेल अभियान के अध्‍यक्ष व पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने रांची प्रशासन पर पक्षपात पूर्ण रवैया का आरोप लगाते हुए रांची के एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रदेश के राज्‍यपाल को पत्र लिखकर शिकायत की है और गंभीर कार्रवाई की मांग की है। पत्र में मांग की गई है: 

1)         कृपया आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा आपको प्रेषित 5 मई 2022 के पत्र का अवलोकन करें। जो संलग्न है। हमलोग 02.05.2022 को आपसे भेंट कर इस मामले पर आपको ज्ञापन पत्र प्रदान करना चाहते थे मगर आप आउट ऑफ स्टेशन थे।

स्कूली मध्याह्न भोजन में रोजाना एक अंडा शामिल हो : अर्थशास्त्री  डॉ ज्यां  द्रेज

by admin on Fri, 06/10/2022 - 12:11

रांची: झारखंड के स्कू‍ली बच्चों के स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा को लेकर जानेमाने अ‍र्थशास्त्री  डॉ ज्यां द्रेज ने चिंता जाहिर की है। डॉ द्रेज ने झारखंड के वित्त् मंत्री को ए‍क पत्र लिखकर इस ओर ध्यान दिलाया है। पत्र में उन्हों ने बताया है कि झारखंड के बच्चे दुनिया भर में सबसे अधिक कुपोषित हैं। इनकी शिक्षा भी पर्याप्त नहीं हो पा रही है। डॉ द्रेज ने सुझाव दिया है कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन को और अधिक पौष्टिक बनाने के लिये थाली में रोजाना एक अंडा शामिल किया जाये। अभी हफ्ते में मात्र दो दिन अंडा दिया जाता है। अर्थशात्री का मानना है कि इन दिनों स्कूलों में बच्चों  की उपस्थिति भी घटती जा रही है। मध्या

आदिवासी सेंगेल अभियान आदिवासी स्‍वशासन व्‍यवस्‍था में सुधार अनिवार्य है

आदिवासी स्वशासन (माझी परगाना) व्यवस्था में सुधार अविलंब अनिवार्य है। अन्यथा आदिवासी समाज में संविधान- कानून और जनतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन जारी रहेगा। कुछ नासमझ व्यक्ति और संगठन प्रथा- परंपरा आदि के नाम पर आदिवासी समाज में नशापान, अंधविश्वास, डायन प्रथा, ईर्ष्या द्वेष, वोट की खरीद- बिक्री, आदिवासी महिला विरोधी मानसिकता, डंडोम  (जुर्माना), बारोन (सामाजिक बहिष्कार), डॉन पनते ( डायन खोज ), वंशानुगत माझी- परगाना व्यवस्था आदि को जोर जबरदस्ती चालू रखते हैं। जो संविधान कानून और मानव अधिकारों के खिलाफ है। अभियान के अध्‍यक्ष सालखन मुर्मू ने एक विज्ञप्ति जारी करके यह बयान दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना वेश्‍यावृत्ति पेशा है, पुलिस परेशान न करे

by admin on Fri, 05/27/2022 - 12:07

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने वेश्यावृत्ति को पेशा माना है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस इसमें दखलंदाजी नहीं कर सकती और न ही सहमति से यह काम करने वाले सेक्स वर्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट ने सभी राज्यों की पुलिस को सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों के साथ सम्मान के साथ व्यवहार करने का निर्देश दिया है। बेंच ने सेक्स वर्करों के अधिकारों की रक्षा के लिए दिशा निर्देश भी जारी किए हैं। कोर्ट ने इन सिफारिशों पर सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई तय की है। केंद्र को इन पर जवाब देने को कहा है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट की ओर से क्या कुछ कहा गया है-

संताली राजभाषा रैली - 30 अप्रैल को रांची में और सरना धर्म कोड रैली - 30 जून को दिल्‍ली 

by admin on Sat, 04/09/2022 - 09:47

आदिवासी सेंगेल अभियान के मंच से झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम राज्यों में 2 मार्च से 3 अप्रैल 2022 तक 5 प्रदेशों में 25 सेंगेल जनसभाओं द्वारा उपरोक्त कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार किया गया है। सेंगेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू और केंद्रीय संयोजक सुमित्रा मुर्मू ने सभी सेंगेल जनसभाओं को 5 प्रदेशों में संबोधित किया है। अभी 5 अप्रैल को असम से दौरे के बाद जमशेदपुर वापस लौटे हैं। फिर 10 अप्रैल को भुवनेश्वर, 12 अप्रैल को गोड्डा जिला (महागामा- महादेवबथन ), 13 अप्रैल दुमका जिला ( रामगढ़ ), 14 अप्रैल गिरिडीह जिला (पीरटांड़- मोनाटंड), 15 अप्रैल पुरुलिया जिला (बलरामपुर), 16 अप्रैल मयूरभंज जि

एचईसी को बहुत याद आयेंगे पिल्लई साब..!

by admin on Thu, 03/31/2022 - 20:29

एचईसी यानी हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सपनों का मंदिर। इस भीमकाय कारखाने ने अपनी स्थापना के बाद से ही भारत ही नहीं दुनिया के स्टील उत्पाद जगत में धूम मचायी थी। लेकिन तीन दशक पहले इसके दिन बिगड़ने लगे थे। एक के बाद एक कई दिग्गज प्रशासकों को इसे संभालने के लिए लाया गया। इन्हीं में से एक थे जी के पिल्लई। पूरा नाम था। गोपी कुमार पिल्लई। पिल्लई जी ने जब एचईसी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक यानी सीएमडी का पद संभाला तो लोगों में जबरदस्त आशा का संचार हुआ। पिल्लई के काम काज से एचईसी के सुधार को लेकर खूब चर्चा हुई। काफी कुछ बदला भी। एचईसी परिसर के लोग और कर्म

देश में वंशानुगत जंजीरों में जकड़े संताली समाज को मुक्‍त कराइये राष्‍ट्रपति महोदय : सेंगेल अभियान

by admin on Wed, 03/16/2022 - 10:29

आदिवासी सेंगेल अभियान का मानना है कि भारत के आदिवासी संताल समाज में व्याप्त वंशानुगत माझी-परगाना स्वशासन व्यवस्था जाने- अनजाने झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम आदि प्रदेशों में संताल समाज को गुलामी की जंजीरों में कैद कर रखा है। यह रूढ़िवादी राजतांत्रिक व्यवस्था भारतीय संविधान, कानून, मानवाधिकारों और जनतांत्रिक प्रक्रियाओं और मूल्यों के खिलाफ खड़ा है। यह व्यवस्था अधिकांश संताल गांव- समाज को पंगु और गुलाम बनाकर रखा है। जिसे निरंकुश और तुगलकी राजा की तरह माझी- परगाना चला रहे हैं। आदिवासी संताल समाज में विद्यमान इस आत्मघाती व्यवस्था की तुलना सती प्रथा के साथ की जा सकती है। अतएव भारत सरकार, संबंध

Bridging digital divide to accelerate India’s development

by admin on Wed, 03/16/2022 - 10:17

Gulf between those who have ready access to computing devices and Internet, and those who do not have, is generally known as digital divide. There is a digital divide between rich and poor in terms of use of computers. Digital divide denies half the world’s citizens access to digital education, work and participation in modern life. Without Internet access, people in vulnerable situations are suffering throughout pandemic driven school and work closures.