गांधी शहादत दिवस पर फैज की नज्‍म और क्रांतिकारी गीत-‍कविताएं, प्रसंग: हम देखेंगे हम बोलेंगे!

रांची: 'हम देखेंगे, हम बोलेंगे' शीर्षक से देश भर में वाम धारा के समर्थकों द्वारा चलाये जा रहे अभियान के तहत रांची में भी शुरूआत हो गई। आयोजकों ने दिन चुना 30 जनवरी, यानी गांधी शहादत दिवस। तय तो हुआ था कि लोग इस दिन बारह बजे मोराबादी स्थित बापू वाटिका में गांधी की प्रतिमा पर फूल चढ़ायेंगे और वहीं से इस कार्यक्रम की शुरूआत होगी। लेकिन दो दिन पहले वहां अपराधियों द्वारा गोली बारी की वारदात के बाद प्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 144 लगा दिया। बुद्धिजीवियों पत्रकारों ने गुहार लगायी कि कम से कम इस अहम दिन पर यह पाबंदी न लगायी जाए। लेकिन प्रशासन की अपनी अकड़ तो होती ही है। इसके बाद तय हुआ कि लोग मोराबादी के टीआरआई परिसर सभागार में कार्यक्रम को अंजाम देंगे। कार्यक्रम के आरंभ में अनिल अंशुमन और सोनी तिरिया की टीम ने डफली पर क्रांतिकारी गीतों से शमां बांधना आरंभ किया। हिंदी और स्‍थानीय भाषाओं की कविताएं, नज्‍म के दौर चले। फैज की नज्‍म 'मेरे महबूब पहली सी मुहब्‍बत न मांग..' पर लोग वाह वाह कर उठे।

Ham Dekhenge

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कविता पाठ करनेवालों में फिल्‍मकार डॉ विनोद कुमार, वरिष्‍ठ पत्रकार श्रीनिवास, डॉ शांति खलखो, डॉ किरण, गुफरान अशर्फी, आलम आरा, नीतिशा खलखो, रामदेव बड़ाईक, अविनाश, महादेव टोप्‍पो, विकास कुमार, रिजवान अली, आदि शामिल थे। जानेमाने वामपंथी चिंतक व स्‍तंभकार डॉ रविभूषण ने बतौर मुख्‍य वक्‍ता देश की बदहाल होते सामाजिक ताना-बाना पर चिंता व्‍यक्‍त की। टीआरआई के प्रमुख और जानेमाने लेखक डॉ रणेन्‍द्र ने भी उदगार व्‍यक्‍त किया। कार्यक्रम में हिस्‍सा लेनेवालों में लेखक पंकज मित्र, वीणा श्रीवास्‍तव, मिथिलेश, फिरदौस समीउल्‍लाह खन, भारती, सत्‍यप्रकाश, फिल्‍मकार मेघनाथ, पत्रकार किसलय, आदि शामिल हुए। पत्रकार का समापन अपने धन्‍यवाद ज्ञापन से किया अशोक वर्मा ने। अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता एम जेड खान की देखरेख में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जनवादी लेखक संघ, इप्टा, झारखंड जन संस्कृति मंच, आदि इस कार्यक्रम में योगदान दे रहे हैं।

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