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देश में वंशानुगत जंजीरों में जकड़े संताली समाज को मुक्‍त कराइये राष्‍ट्रपति महोदय : सेंगेल अभियान

by admin on Wed, 03/16/2022 - 10:29

आदिवासी सेंगेल अभियान का मानना है कि भारत के आदिवासी संताल समाज में व्याप्त वंशानुगत माझी-परगाना स्वशासन व्यवस्था जाने- अनजाने झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम आदि प्रदेशों में संताल समाज को गुलामी की जंजीरों में कैद कर रखा है। यह रूढ़िवादी राजतांत्रिक व्यवस्था भारतीय संविधान, कानून, मानवाधिकारों और जनतांत्रिक प्रक्रियाओं और मूल्यों के खिलाफ खड़ा है। यह व्यवस्था अधिकांश संताल गांव- समाज को पंगु और गुलाम बनाकर रखा है। जिसे निरंकुश और तुगलकी राजा की तरह माझी- परगाना चला रहे हैं। आदिवासी संताल समाज में विद्यमान इस आत्मघाती व्यवस्था की तुलना सती प्रथा के साथ की जा सकती है। अतएव भारत सरकार, संबंध

संताली भाषा को प्रथम राजभाषा का दर्जा की मांग को लेकर सेंगेल अभियान का आंदोलन

शनिवार 5 मार्च 2022 को संताल हूल / विद्रोह (1855-56) के महान नायक वीर शहीद सिदो मुर्मू के गांव भोगनाडीह, जिला साहिबगंज, झारखंड में बीरमाटी को मुट्ठी में लेकर भारत के 5 प्रदेशों के सेंगेल प्रतिनिधि और अन्य "सेंगेल शपथ सभा" में शामिल हुए।  शपथ लिया कि हम निम्न 10 प्रमुख मांगों और लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जी जान से लग जाएंगे, काम करेंगे और सफल बनाएंगे :-

1) भारत सरकार और अन्य सरकारें आदिवासियों के प्रकृतिपूजा धर्म - सरना धर्म कोड को अविलंब मान्यता प्रदान करें और जनगणना में शामिल करें।

आदिवासी सेंगेल अभियान ने राज्‍यपाल को 'भाषा विवाद' पर मांगपत्र सौंपा

झारखंड के गवर्नर रमेश बैस से आदिवासी सेंगेल अभियान, केंद्रीय सरना समिति और अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की तरफ से 12 सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने मिलकर 7 सूत्री ज्ञापन -पत्र प्रदान किया। फिलहाल पूरे झारखंड में जो भाषा विवाद और 1932 खतियान का स्थानीय नीति पर गरमा गरम बहस जारी है ऐसी परिस्थिति में समाधानमूलक कुछ मांगों को राज्यपाल के सामने रखा गया।

झारखंड में प्राथमिक बच्चों के लिए व्यापक साक्षरता अभियान चलाने की मांग जोर पकड़ रही

झारखंड में आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के आलोक में लगभग दो वर्षों बाद प्राथमिक वर्ग की कक्षाएं 4 फरवरी 2022 से शुरू हुई। इसमें उस वक्त राज्य के कुल 24 जिलों में से सिर्फ 17 जिलों को ही इसमें शामिल किया गया। अभी हाल में राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि शेष 7 जिलों में भी प्राथमिक कक्षाएं शुरू करने पर निर्णय शीघ्र लिया जाएगा। उन सात जिलों में कोल्हान कमिश्नरी के जिले भी शामिल हैं। अब कोल्हान कमिश्नरी मुख्यालय चाईबासा में उपयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कुछ सामाजिक संगठनों ने इन प्राथमिक वर्ग के बच्चों को लिए व्यापक साक्षरता अभियान चलाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि रांची यूनिवर्सिटी

झारखंड भाषा विवाद में सेंगेल अभियान भी कूदा

झारखंड में चल रहा भाषा विवाद थम नहीं रहा है। अब इसमें आदिवासी सेंगेल अभियान भी कूद पड़ा है। अभियान के अध्‍यक्ष व पूर्व सांसद सालखन मुर्मू झारखंड पक्ष रखने के लिए दो मार्च को झारखंड के राज्‍यपाल से मिल कर पांच सूत्री मांग पत्र सौंपेंगे। साथ ही कई आंदोलनात्‍मक कार्यक्रम की भी घोषणा की गई है। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए मुर्मू कहते हैं कि राज्यपाल, झारखंड द्वारा केंद्र को प्रेषित रिपोर्ट से प्रतीत होता है झारखंड और झारखंडी भयंकर उबाल पर खड़े हैं। आदिवासी सेंगेल ( सशक्तिकरण ) अभियान का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू के नेतृत्व में 2 मार्च 2022 को राज्यपाल, झारखंड को मिलकर निम्

यूपी चुनाव के लिए 'भगवा ब्रिगेड' झारखंड में ऐक्टिव - सोशल मीडिया

बरही (हज़ारीबाग़, झारखण्ड): एक किशोर रूपेश पाण्डे की हादसे में हुई मौत की घटना को साम्प्रदायिक झगड़े- दंगे में बदलने की पुरज़ोर कोशिश चल रही है। माना जा रहा है कि इसके पीछे भाजपा समर्थित गुटों-संगठनों का हाथ है। इसी प्रसंग को हवा देने के लिए 'दंगा सुलगाने' वाले कपिल मिश्रा को भी लाया गया, जिसे झारखण्ड सरकार ने हवाई अड्डे से ही लौटा दिया। पत्रकार और जे पी आन्दोलन के ऐक्टिविस्‍ट अशोक वर्मा ने सोशल मीडिया ग्रुप में यह आलेख पोस्‍ट किया है। उनका सवाल है, क्या भाजपा उ० प्र० चुनाव जीतने के लिए यह सब कर रही है? पढि़ये विस्‍तार से.. 

हिजाब के बहाने नागरिक आज़ादियों को कुचलने की कोशिश

हिजाब प्रकरण देश भर में पसरता जा रहा है। यह महज एक तत्‍कालीन राजनीतिक खुराफात है या कोई सोची समझी दूर की साजिश? कुछ ऐसे ही सवाल इन दिनों फिजां में तैर रहे हैं। कई तरह के विचार-मीमांसा सामने आते जा रहे हैं। सोशल मीडिया में तो जैसे इस तरह के पोस्‍ट की बाढ़ आ गई है। झारखंड फोरम ने उनमें से कुछ चुनिंदा पोस्‍ट को अपने पाठकों तक पहुंचाने का फैसला लिया है। इसी क्रम में यहां पेश है व्‍हाट्सऐप ग्रुप 'हम देखेंगे झारखंड' द्वारा जारी यह पोस्‍ट जिसे जनवादी लेखक संघ (जलेस) के सचिव एम जेड खान ने अपने एकाउन्‍ट से जारी किया है। एक बार तो पढ़ना लाजिमी है..

झारखंड में सरकारी तंत्र द्वारा मानवाधिकार हनन के मामले जारी, सुरक्षा के नाम पर बढ़ रही असुरक्षा : डॉ ज्‍यां द्रेज 

by admin on Tue, 02/08/2022 - 16:59

पुलिस व सुरक्षा बलों के दमनकारी रवैये, मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों व अवैध खनन का विरोध करने के लिए आज राजभवन के समक्ष झारखंड जनाधिकार महासभा के आव्हान पर राज्य भर के अनेक जन संगठनों के लोगों ने धरना दिया। धरने की शुरुआत करते हुए सञ्चालन कर रहे अम्बिका यादव और अलोका कुजूर ने धरने की प्रष्टभूमि रखी। रघुवर दास सरकार की जन-विरोधी नीतियों व गतिविधियों के विरुद्ध वर्तमान राज्य सरकार को स्पष्ट जनादेश मिला था। वर्तमान सरकार भाजपा सरकार से कई मामलों में बेहतर तो है, लकिन अभी भी आदिवासी-मूलवासियों, खास कर के वंचितों, के विरुद्ध विभिन्न तरीकों से प्रशासनिक और पुलिसिया दमन हो रहा है। लगातार आदिवासी-मू

झारखंड के सरकारी विभागों का ढ़ुलमुल रवैया, पांच हजार सफल बेरोजगार अभ्‍यर्थी हफ्तों से अनशन पर

रांची: झारखंड कर्मचारी आयोग व प्रशासनिक सुधार विभाग के ढ़ुलमुल रवैये से प्रदेश के 4948 अभ्‍यर्थी इन दिनों राजभवन के सामने अनशन पर है। ये सभी अभ्‍यर्थी वर्ष 2017 में कर्मचारी आयोग के विज्ञापन के आधार पर विभिन्‍न परीक्षाएं पास कर चुके हैं। अगस्‍त 2019 में इनके प्रमाणपत्रों की जांच भी विभाग द्वारा कर ली गई है। लेकिन अबतक राज्‍य के 24 जिलों की मेधा सूची जारी न किये जाने से ये अभ्‍यर्थी काफी क्षुब्‍ध हैं। ये अधिकांश बेहद गरीब परिवार से आने वाले स्‍थानीय युवा हैं। अभ्‍यर्थियों ने बताया कि परीक्षा के विभिन्‍न चरणों, जैसे, लिखित परीक्षा, कौशल जांच, कम्प्‍युटर योग्‍यता एवं चालन परीक्षण तथा हिन्‍दी अ

झारखंड की नई पर्यटन नीति : ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

रांची : झारखण्ड सरकार राज्य में पर्यटन को विश्व पटल पर लाने के प्रति संजीदा है। ऱाज्य की भौगोलिक स्थिति व प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटन के लिहाज से अनुकूल है भी। सरकार ने राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करने और उन्हें गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध कराने के उदेश्य से पर्यटन के क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए नई पर्यटन नीति बनाई है। पर्यटन नीति की मंत्रिपरिषद से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसमें कोई संदेह नहीं कि आने वाले दिनों में पर्यटन से रोजगार के अवसर सृजित करने और राजस्व में बढ़ोतरी करने के विजन के साथ झारखण्ड पर्यटन के क्षेत्र में बदलाव का वाहक बनेगा। राज्य पर्यटन विकास की संभावनाओं