Opinion

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झारखण्ड के आदिवासियों का समाजवादी जीवन-दर्शन

सोवियत महल के विघटन के साथ ही समाजवाद का पतन शुरू हो गया और अब दुनिया के अधिकांश देशों से करीब-करीब विदा हो चुका है। संसदीय लोकतंत्र के आवरण में पूंजीवाद समस्त जगत में अपना पैंठ जमा चुका है। तथाकथित रूस और चीन जैसे साम्यवादी देशों से भी समाजवादी मूल्य गायब हो चुके हैं। मौजूदा समय में इन देशों में राज्य प्रायोजित पूंजीवादी व्यवस्था विद्यमान है। साम्यवाद के मुखौटे में ये दोनों देश भी पूंजीवादी ही हैं; मूल्य, विचार, दर्शन, उत्पादन-वितरण की प्रणाली का दूर-दूर तक समाजवाद-साम्यवाद से कोर्इ सरोकार नहीं है।

संताली भाषा-संस्‍कृति का तिरस्‍कार बर्दास्‍त नहीं : सालखन मुर्मू

पूर्व सांसद व सेंगेल अभियान के अगुआ सालखन मुर्मू ने एक खुला पत्र लिखकर संताल समाज और सरकार को उलाहना दी है। 10 अक्‍टूबर 2021 को दुमका में आयोजित संताली लेखकों का एक सम्‍मेलन हुआ था। सालखन कहते हैं उसमें संताली हासा-भाषा के मुद्दे दरकिनार किये गए इसका उन्‍हें दु:ख और आक्रोश है। मुर्मू कहते हैं झारखंड में लम्‍बे समय से सरकार और प्रशासन में तमाम संताली नेता काबिज हैं लेकिन संतालों की मूल जरूरतों को नजरंदाज किया जाता रहा है इसकी वह निंदा करते हैं। पढि़ये सालखन मुर्मू का वह खुला पत्र: 

जेपी को अंतिम विदाई... [ पुण्यतिथि पर विशेष ]

उस दिन- आठ अक्टूबर 1979-  मैं मुजफ्फरपुर में था. मेरा परिवार तब वहीं था. हम एक दिन पहले पहुंचे थे. संघर्ष वाहिनी की राष्ट्रीय परिषद में भाग लेने. कनक (लिखना पड़ रहा है, भारी मन से- जो अब नहीं हैं) और शायद अंजली जी भी साथ थीं. तब तक कनक से रिश्ता महज मित्रता का था. देश भर से साथी आ रहे थे. आ चुके थे. कुछ समारोह स्थल पर, कुछ स्थानीय मित्रों के घर रुके थे। सुबह तैयार होकर नाश्ता करते हुए आठ बजे आकाशवाणी पर वह समाचार- कि जेपी नहीं रहे- सुन कर हम स्तब्ध रह गये. परिवार के लोग भी. आपस में बिना कुछ बोले हम पटना लौटने की तैयारी करने लगे.

मॉब लिंचिंग” नहीं, इसे “संगठित आपराधिक गिरोह” कहिए जनाब..

स्वामी अग्निवेश पर दो बार हमला. महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतीहारी के प्रोफेसर पर घर में घुस कर हमला. ऐसी घटनाओं को अगर आप “मॉब लिंचिंग” बताते है, तो आप बहुत बडी गलती कर रहे है. ये मॉब लिंचिंग नहीं है. ये बकायदा षडयंत्र कर, संगठित तरीके से एक खास समूह के द्वारा किया जाने वाला अपराध है. इसलिए, इसे “संगठित आपराधिक गिरोह कहिए”. आपराधिक इसलिए कि भारत के संविधान में, कानून में कहीं भी नहीं लिखा है कि अगर आपकी भावना आहत होती है तो आप किसी की जान ले लेंगे. वैसे भी यहां मामला भावनाओं के आहत होने का भी नहीं है.

क्या पत्थलगड़ी असंवैधानिक है?

by admin on Mon, 11/13/2017 - 17:46

झारखंड के आदिवासी इलाकों में हो रही पत्थलगड़ी से सरकार की नींद हराम हो गई है। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास रांची में बड़ा-बड़ा हार्डिंग लगवाकर एवं अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से कड़ा संदेश दे रहे हैं कि पत्थलगड़ी असंवैधानिक है और जो भी इसमें शामिल है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जायेगी। मैं इन दिनों झारखंड के खूंटी एवं पश्चिमी सिंहभूम जिले के ‘मुंडा’ एवं ‘हो’ आदिवासियों के इलाका में घुम रहा हॅं। यहां प्रत्येक गांव के ससनदिरी में पत्थलगड़ी का अदभुत दृश्य दिखाई पड़ता है, जो मृत्यु के बाद भी आदिवासी समाज का मूल आधार ‘सामुदायिकता’ का एहसास कराता है। आदिवासी अपने पूर्वजों

राम की तपोभूमि 'चित्रकूट' में जीती कांग्रेस, मगर हारा कौन?

by admin on Mon, 11/13/2017 - 16:10

भोपाल, 12 नवंबर (आईएएनएस)| मध्यप्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के साथ खास तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए अहम था। वजह यह कि चित्रकूट राम की तपोभूमि तो है ही, साथ ही चौहान अपने को विकास का पैरोकार बताते रहे हैं। परिणाम कांग्रेस के खाते में गया, इसीलिए सवाल उठ रहा है कि 'आखिर हारा कौन?' 

48 और ट्रेनों पर सुपरफास्ट शुल्क लगाकर सुधरेगा रेलवे?

by admin on Tue, 11/07/2017 - 19:00

नई दिल्ली:  नकदी की भूखी भारतीय रेल ने 48 और मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट श्रेणी में 'अपग्रेड' कर किराया बढ़ा दिया है, लेकिन इन ट्रेनों की स्पीड में महज 5 किलोमीटर की बढ़ोतरी कर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दी गई है। 

पहली नवंबर को जारी रेलवे के नए टाइम टेबल से यह जानकारी मिली। हालांकि यह 'उन्नयन' कोई गारंटी नहीं है कि ये ट्रेनें समय पर ही चलेंगी। इसके अलावा नया शुल्क ठंड का मौसम शुरू होने से पहले बढ़ाया गया है। जाहिर है, उत्तर की तरफ जानेवाली सारी ट्रेनें ठंड और कुहासे के कारण कई-कई घंटे देर से चलेंगी।